राजनीति में तुष्टीकरण की परकाष्ठा !

ये सन्नाटा क्यूँ है भाई…………आप सभी इस डायलॉग से परचित अवश्य होंगे क्यों की ये डायलॉग मशहूर फ़िल्म शोले का है। ये आज की राजनीतिक माहौल में सटीक बैठ रहा है। ममता दीदी के आज दिये बयान ने धर्मनिरपेक्ष का ढोंग रचने वाले नेताओं में इस विवादित बयान ने सन्नाटा फैला दिया है । सब इसे लेकर गूँगे बन गए हैं। ममता ने दुर्गा पूजा व मोहर्रम के एक साथ पड़ने पर लाइन ऑडर की दुहाई देकर एक दिन यानी 01 अक्टूबर के दिन मूर्ति विसर्जन पर पूरे बंगाल में रोक लगा दी है। कोई सेक्युलर नेता ममता सरकार के घटिया निर्णय का विरोध करने हिमाकत कर नही पा रहा है। क्योंकि कही विशेष समुदाय नाराज न हो जाये। इतना ही नही ममता के धुर विरोधी वामपंथी भी विरोध के बजाय हाँ में हाँ मिलाते tv चैनलों के डिवेट में दिख जायेंगे क्योंकि मामला अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़ा है। ममता दीदी के इस राजनीति को देख यही लगता है कि उनकी सरकार सिर्फ मुस्लिम समुदाय के लिए ही बनी है। बाकी बंगाली जनता के लिए उनकी सरकार में कोई जगह नही है। माँ,मानुष व माटी का नारा शायद ममता सरकार भूल चुकी हैं। जिस प्रकार एक विशेष धर्म की भावनाओं के लिए बहुसंख्यक समुदाय की भावनाओं आहत किया जा रहा है। आदिकाल से आ रही परम्परा को रोक कर ममता क्या सन्देश देना चाह रही हैं ,ये समझ से परे है। इससे पहले भी 1982 व 1983 में भी विजयदशमी व मोहर्रम एक साथ पड़ चुका है। तब तो कोई लाइन आर्डर नही बिगड़ा ,और अब बिगड़ जायेगा ,आखिर क्यों ! पुलिस प्रशासन क्या करेगा ,उसका क्या काम है। क्या वो भी ममता दी के साथ मातम ही मनाता रह जायेगा। कुछ तो शर्म करो ममता दीदी,आप तो सारे बंगाल की मुख्यमंत्री को न कि सम्प्रदाय विशेष का । तृणमूल सरकार के ऐसे कई फैसले पर कोर्ट तक को हस्तक्षेप करना पड़ा। दुर्गा पांडाल न लगाने, मौलाना-मुफ़्ती को मानदेय जैसे फैसलों पर कोर्ट ने हस्तक्षेप किया था । एक बार फिर ये मामला कोर्ट में जा रहा है। इससे तो अच्छा है कि जनता सरकार के अदूरदर्शी फैसले झेलने के बजाए कोर्ट को अपना सरकार न मान लें। अनेक जिलों में दुर्गा प्रतिमा स्थापित इसलिये नही करने दिया जा रहा है कि वहाँ मुस्लिम आबादी है ,उन्हें परेशानी होगी। कानून व्यवस्था ख़राब होने की आशंका कारण बताया गया और वर्षों से पूजा नही हो रही है। वो भी वहाँ जिस गाँव में सैकड़ों घर में चार-पांच घर ही हिंदुओं के जोकि वहां मिलजुल कर रहते हैं। कौन समझाये ममता दीदी को यहाँ कौन सा दंगा फसाद हो जायेगा! राजनीति की तुष्टीकरण नीति ने ही कांग्रेस का ये हाल हुआ है । फिर भी इन सेक्युलर नेताओं की आदत सुधर नहीं रही है। कांग्रेस की गति से ममता भी सबक नही ले रही हैं। कोई भी नेता व दल तुष्टीकरण की नीति से जनता व देश दोनों का भला नही कर सकता है,और न खुद का भला होगा। ममता जी ओछी हरकतों से सरकार नही चलती है। किसी धर्म की भावनाओं को आहत न करो वरना धरती पर पटकने में देर नही लगाएगी । सेकुलरों की तो आदत ही है कि वोट के लिए अल्पसंख्यक के मामले में चुप्पी साधना ही उनके हित में होता है।इसलिए तो कहते हैं की राजनीति के गलियारे में …….ये सन्नाटा क्यूँ है भाई…….।
@नीरज सिंह

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