राहुल की रणनीति पर भारी पड़ा मोदी मैजिक

दो राज्यों के चुनाव परिणाम आ चुके हैं। जिसमें बीजेपी ने अपने गढ़ गुजरात को न केवल बचाया बल्कि हिमाचल प्रदेश को कांग्रेस से छीनने में कामयाब रही है। इस तरह विगत साढ़े तीन वर्ष में बीजेपी की केंद्र की सरकार सहित 19 राज्यों में सरकार बना लिया है। अब हम सबसे अहम् चुनाव की बात करें जिसे भारतीय राजनीति में काफी महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसी राज्य से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी आते हैं। इतना ही इसी राज्य के गुजरात मॉडल के चलते बीजेपी की सरकार केंद्र भी बनी थी।  हाल के गुजरात विधानसभा के चुनाव में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस सहित सभी बीजेपी के विरोधियों गुजरात मॉडल को लेकर ही हमला बोला है। और गुजरात में  22 वर्षों से चल रही बीजेपी सरकार को घेरने का मन बनाया । इसमें कांग्रेस व अन्य काफी सफल भी रहे। अब मोदी के गुजरात मॉडल को कसौटी पर कसा जाने लगा। राहुल गांधी भी गुजरात में डेरा डाल दिया और गांवों की खाक छानना शुरू कर दिया। इसी भी पाटीदार आंदोलन की अगुवाई कर रहे हार्दिक पटेल, दलित नेता जिग्नेश, व अल्पेश ठाकोर,जैसे युवा नेताओं का भी साथ मिला। इतना ही नही व्यवसाइयों में gst को लेकर बहुत नाराजगी थी।  किसानों में भी गुस्सा दिख रहा था। इसे ही भुनाने के लिए कांग्रेस दूने उत्साह से चुनाव कैंपेनिंग में जुट गई। बीजेपी को भी अग्निपरीक्षा से गुजरना पड़ रहा था। देश दुनिया की निगाहें गुजरात चुनाव व उसके नतीजों पर टिक चुकी थी,दिनोदिन चुनाव परवान चढ़ रहा था। अब बीजेपी जिस मॉडल के बल पर 2012 लोकसभा से लेकर अनेक चुनाव जीत चुकी भाजपा अपने ही गढ़ में फंसी दिखी। अगर नतीजा विपरीत रहा तो प्रधानमंत्री मोदी की साख विदेशों में भी धूमिल होती और विपक्ष को मोदी व बीजेपी के खिलाफ एक बड़ा मुद्दा मिल जाएगा। लेकिन अमित शाह की रणनीति व मोदी के मैजिक के आगे विपक्षियों की एक न चली और नतीजा आया तो 6वीं बार फिर गुजरात में बीजेपी सरकार बनी। राहुल गांधी की साफ्ट हिन्दुवत्त्व भी काम न आया। एक आसान पिच भी राहुल बैटिंग कांग्रेस को जीत नही दिला सकी। जिस विकास पर कांग्रेस हमला कर रही थी और गुजरात मॉडल पर सवाल उठा रही थी,वहीं बीजेपी ने इस चुनाव को गुजरात की अस्मिता से जोड़ दिया।  बाकी कसर मणिशंकर अय्यर के मोदी को नीच कहने और कपिल सिब्बल के राम मन्दिर को 2019 के बाद बनाने वाली बात ने गेमचेंजर साबित हुआ और मोदी का रास्ता और आसान कर दिया। और एक बार फिर बीजेपी को जनता ने पुनः सत्ता सौंप दी।  राजनीति विशेषज्ञों का कहना है कि नोटबन्दी, जीएसटी जैसे मुद्दे व्यवसाइयों को अधिक प्रभावित नही कर सके । इतना ही नही उनका मानना यह भी है कि बीजेपी से जनता को नाराजगी थी ,लेकिन प्रधानमंत्री मोदी को अब भी मानते हैं। यही हुआ भी पहले चरण में बीजेपी के पिछड़ने के मोदी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दिया और नतीजे को अपने पक्ष में किया। और जनता में मोदी मैजिक चल निकला। कांग्रेस के लिए राहत की ये बात है कि उसने 22 वर्ष बाद गुजरात में जोरदार टक्कर दी और अपने सीटों की संख्या में बड़ा इजाफा किया,वही बीजेपी को 99 सीटों पर समेट दिया जोकि 2012 में 115 थी। लेकिन कांग्रेस के शक्ति सिन गोहिल सहित 05 बड़े नेताओं की हार कहीं न कहीं कांग्रेस की कमजोरी दिखाता है। कांग्रेस के इस प्रदर्शन में हार्दिक,जिग्नेश,व अल्पेश की तिकड़ी की भूमिका अहम थी। फिलहाल कांग्रेस इस चुनाव में हार कर भी जीतने का दावा  कर रहे हैं। लेकिन जीत तो उसे ही हासिल है जो ट्रॉफी या सरकार बनाये। बीजेपी भी इस चुनावी परिणाम ने राहुल को हल्के में लेने की गलती नही करेगा।  मोदी ने आज एक नारा दिया कि जीतेगा भाई जीतेगा , विकास ही जीतेगा… नारा देकर ये संकेत दे दिया है कि अगले चुनाव विकास पर ही लड़ेगी। 2019 लोकसभा चुनाव में विकास को कसौटी पर रहेगा। अंत में एक बार फिर कहना है दो राज्यों के चुनाव ने ये साबित कर दिया है कि मोदी मैजिक जारी है। @NEERAJ SINGH

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