गूगल ने किया प्राइवेसी पॉलिसी में अहम बदलाव

_92082282_036033724-1000

ऑनलाइन पर आपकी बातें ‘प्राइवेट’ न होंगी

फ़ेसबुक

ऑनलाइन विज्ञापन देने वाली कंपनियों ने लोगों से ये हमेशा कहा है कि उनके बारे में जो जानकारी इकठ्ठा की जाती है वो हर तरह से एनोनिमस होती है यानि किसी की भी नाम से पहचान नहीं की जाती है.

गूगल ने भी हमेशा से यही कहा है.

लेकिन प्रो पब्लिका की रिपोर्ट (https://www.propublica.org/article/google-has-quietly-dropped-ban-on-personally-identifiable-web-tracking) के अनुसार गूगल ने हाल ही में अपनी प्राइवेसी पॉलिसी में अहम बदलाव किये हैं. इस बदलाव के बाद गूगल ने लोगों के बारे में जो डेटा अपने पास रखा है उसे लोगों के नाम के साथ जोड़ा जा सकता है.

पिछले दशक में गूगल ने डबल क्लिक नाम की कंपनी को खरीदा था. दुनिया भर के लोगों के इंटरनेट पर ब्राउज़िंग की आदतों के बारे में इस कंपनी के पास जानकारी है. गूगल ने जीमेल से लोगों के बारे में जानकारी और उनके नाम को डबल क्लिक के डेटा के अलग रखा था. गूगल ने लोगों से ये वादा किया था कि उन दोनों को अलग रखा जाएगा.

लेकिन प्रो पब्लिका के अनुसार कुछ महीने पहले हुई इस बदलाव में गूगल अब दोनों डेटा को एक साथ कर सकता है. ये बदलाव नए जीमेल अकाउंट के डिफ़ॉल्ट सेटिंग में शामिल किया गया है. जो लोग जीमेल सब्सक्राइबर हैं उन्हें इस बदलाव के लिए हामी देने के लिए ईमेल भेज गया था.

गूगल की तरफ से प्रो पब्लिका को एक ईमेल भेज गया जिसमें ये कहा गया कि प्राइवेसी पालिसी में बदलाव ‘स्मार्टफोन क्रांति’ के कारण कारण किया गया है. गूगल ने इस बारे में जो कहा उसे यहां (https://www.documentcloud.org/documents/3145771-Google-Statement.html) पढ़ सकते हैं.

इंटरनेट ब्राउज करने की आदत और किसी के बारे में पर्सनल जानकारी को एक साथ देखना ऑनलाइन दुनिया के लिए काफी विवादास्पद मामला रहा है. जब गूगल ने 2007 में डबल क्लिक को खरीद था तब उसने कहा था (https://web.archive.org/web/20060901003537/http://www.doubleclick.com/us/about_doubleclick/privacy/dart_adserving.asp) कि पर्सनल जानकारी के बारे में कोई भी डेटा नहीं लिया जाएगा. 2012 में गूगल ने अपने सभी सर्विस के साथ गूगल के डेटा को शेयर करने की पॉलिसी की घोषणा की. डबल क्लिक की खूबी है कि वो दस लाख से ज़्यादा पसंद किये जाने वाले वेबसाइट पर लोगों के ब्राउज़िंग की आदत को ट्रैक करता है.

प्रो पब्लिका के अनुसार (https://www.propublica.org/article/its-complicated-facebooks-history-of-tracking-you) 2014 में फेसबुक ने ये घोषणा की थी कि वो लोगों के नाम से उन्हें ऑनलाइन ट्रैक करने की कोशिश करेगा. एक बारे फेसबुक ने इसकी घोषणा की उसके बाद कई ऐसी कंपनियां जो लोगों के बारे में जानकारी इकठ्ठा करती हैं उन्होंने ने अपनी सर्विस को ऑनलाइन देना शुरू कर दिया.

दस साल से ऑनलाइन विज्ञापन देने वाली कंपनियों ने आपके ब्राउज़िंग के बारे में जो जानकारी इकठ्ठा की है उसे जब आपके नाम या फ़ोन नंबर से मिला कर देखा जाएगा तो ये साफ़ हो जाएगा कि आपकी पर्सनल पसंद और नापसंद क्या है. गूगल, शायद, ऐसी ही कोशिश कर रहा है.

@bbc

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *