अंग्रेजी हुकूमत में बने डाक बंगले की दुर्दशा

Daag bangla

अखिलेश शुक्ला—–

अमेठी जिले के शुकुल बाजार में अंग्रेजी हुकूमत में बने डाक बंगले में कभी वीवीआई नेताओं का जमावड़ा लगता था लेकिन समय बदलता गया और यही डाक बंगला अब जंगली जीवों का आशियाना बना हुआ है हाँ ये सच है आप चौंक गये होंगे। सिंचाई विभाग द्वारा 1940 में निर्मित बाजार शुकुल में स्थित डाक बंगला की । जहॉ देश के भारतरत्न राजीव गॉधी स्वंय अपने परिवार के साथ रातें गुजारते थे । वहीं डाक बंगला रख रखाव व विभाग की उदासीन रवैया के चलते झाड़ियों के बीच कमरे , कमरों के टूटे दरवाजों के बीच कमरों में दिखते बेड, कुर्सी मेज, व अन्य कई प्रसाधन जंगली जानवरों केआशियाना के रूप में तब्दील हो चुका है । बता दें कि सिंचाई विभाग द्वारा क्षेत्र में गिरॉवा रजबहा निर्गत करायी गई थी । जहॉ अंग्रेजी हुकूमत के समय इसी डाक बंगले में विभागीय अधिकारियों व अतिथियों के ठहरने की उचित व्यवस्था रहा करती थी । विभागीय अधिकारियों के निरीक्षण की दृष्टि से सुलभ था । देश के आजादी के सात वर्ष पूर्व 76 वर्ष पुराना डाक बंगला वर्तमान में देख रेख के अभाव में जंगली जानवरों का अशियाना बन चुका है । जिसमें अमेठी संसदीय क्षेत्र के वर्तमान सांसद राहुल गॉधी भी बाल्यावस्था में अपने पिता भारत रत्न राजीव गॉधी के साथ उक्त डाक बंगले में रात गुजार चुके हैं । शीर्ष राजनेताओं के आवागमन का सिलसिला जब तक होता रहा, तब तक यह गुलजार रहा । परन्तु समय के बदलते वक्त में जैसे ही सियासतदारों के यहॉ आवागमन का क्रम टूटा, वैसे ही इस डाक बंगला का बुरे वक्त आने प्रारम्भ हो गये । विभागीय अधिकारी व कर्मचारियों का ठहराव अभाव ग्रस्त हो गया । वर्तमान में खिड़की, दरवाजा , तो भले टूट चुके हैं किन्तु छत की मजबूती को छत पर उगे विशालकाय पीपल का पेड डाक बंगला के दुर्दशा बयां कर रहा है। यहॉ तक की डाक बंगले तक पहुॅचने के लिए झाड़ियों से गुजरना पड़ेगा । विभाग की ओर से रखरखाव में उदासीनता एवं सियासतदारों की उपेक्षा दृष्टि से शुकुल बाजार का डाक बंगला जंगली जीवों के आशियाना की पहचान बन गया हैं । सेवा निवृत्त एक चौकीदार उक्त परिसर में निवास तो करता देखा जा रहा है लेकिन उसे भी इस डाक बंगले की चिन्ता नहीं रही । विधानसभा जगदीशपुर विधायक राधेश्याम कनौजिया के नाना रामसेवक धोबी 1967 से 2007 तक 9 बार विधायक रह चुके लेकिन इस डाक बंगला की सुधि लेना जरूरी नहीं समझा, वहीं मौजूदा विधायक राधेश्याम भी इस ऐतिहासिक डाक बंगला के रखरखाव व मरम्मत करवाना जरूरी नहीं समझ रहें । वहीं क्षेत्रीय समाजसेवियों की माने तो इस डाक बंगले का जीर्णोद्धार विधायक अपने विधायक निधि से करवा सकते थे किन्तु कमीशन खोरी के चक्कर में दलालों के बीच घिरे रहे, लेकिन इस ऐतिहासिक डाक बंगला ही क्या पीने के लिए जो हैण्ड पम्प आदि दिये वो भी कमीशन खोरी के दलदल में देखा जा रहा है। यहीं कारण हैं कि क्षेत्र में लोग राधेश्याम हटाओं का नारा दे रहें है। इसकी दुर्दशा के सम्बन्ध में सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियन्ता ने कहा कि ‘‘रखरखाव सम्बन्धी धन की जानकारी मुझे नहीं किन्तु विश्व बैंक के माध्यम से अथवा परियोजना बनायी जा रही है अगले वित्तीय वर्ष में डाक बंगलों का जीणोंद्धार कराया जायेगा’’ ।
फिलहाल यहॉ का डाक बंगला उपेक्षा का शिकार होता देखा जा रहा हैं अब देखना यह हैं कि शुकुल बाजार का डाक बंगला पूर्व की भाँति कब गुलजार हो सकेगा ।

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