हमारा आधार हमारे पूर्वज व पित्रपक्ष का महत्व।

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आकांक्षा सिंह रायबरेळी
हर साळ पित्रपक्ष भ्राद्रपदा ;सितम्बर. अक्टूबर में मनाया जाता है। सनातन धर्मानुसार पित्रपक्ष में हमारे पूवजों का श्राद्ध व तर्पण श्रद्धा भाव से किया जाता है। हिंदू धर्म में पित्रपक्ष को बेहद महत्वपूर्ण संज्ञा दी जाती है। इन दिनों बेहद श्रद्धा व संयम के साथ उनको याद करके सुख षांति हेतु श्रद्धा भाव से तर्पण व श्राद्ध किया जाता है। यह वो समयकाळ होता है जिसमें माना जाता है कि हमारे पूर्वज विभिन्न रूपों में हमको आर्षीवाद देने आतेे हैं। इसका दूसरा पहळू हमें इस बात से अवगत कराता है कि हमें अपने आसपास हर व्यक्ति जीवजन्तु सभी का प्रेम भाव से आदर भाव करना सिखाता है। वास्तव में अगर देखा जाये तो हमें अपनी इस भागदौड भरी जिंदगी में हम अपने ही आप कहीं न कहीं जळदी आगे बढने क्रोघ व लोभ के कारण अपने स्वभाव में षांति व संयम नहीं रख पाते हैं। उस स्थिति में हमें अपना आधार पूर्वजों को नहीं भूळना चाहिए। खासकर हम कौन और क्यों हैं। कारण जो व्यवहार हम अपने आचरण में ळायेंगें वो हमारे आने वाळे कळ पर पडेगा। हमारे पूर्वजों के षुभ आर्षीवाद के द्वारा ही हमारा वजूद हमारी पहचान बनती है। जिसे हमें कभी नहीं भूळना चाहिए। कळ पित्रपक्ष का अन्तिम दिन है। जिन ळोगों ने इस पित्रपक्ष में श्राद्ध व तर्पण ना किया हो वे कळ सोमवती अमावस्या में अन्तिंम दिन श्रद्धा भाव से तर्पण व श्राद्ध कर सकते हैं।

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1 Response

  1. lokdastak says:

    Very nice article ji

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